शिमला मस्जिद विवाद – क्या हुआ फैसला? हिन्दू समाज की बड़ी जीत

21 नवंबर 2025 को शिमला के संजौली क्षेत्र में हिन्दू संघर्ष समिति की अगुवाई में हिन्दू समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। यह प्रदर्शन शिमला मस्जिद विवाद से जुड़े मुद्दों को लेकर किया गया था। लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी तीन प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखीं।

हिन्दू रक्षा मंच के अध्यक्ष श्री कमल गौतम ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि सरकार ने सभी तीन मांगों को लिखित रूप में स्वीकार कर लिया है, जो हिन्दू समाज की एक बड़ी जीत मानी जा रही है। सरकार द्वारा सभी मांगे मान लिए जाने के बाद अनशन पर बैठे लोगों ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है।

संजौली में हिन्दू समाज की एकजुटता और आंदोलन ने सरकार को गंभीर निर्णय लेने पर मजबूर किया। हिन्दू संघर्ष समिति और हिन्दू रक्षा मंच ने यह स्पष्ट किया है कि वे कानून के दायरे में रहकर अपने धार्मिक अधिकारों की रक्षा करते रहेंगे। यह घटनाक्रम शिमला में बढ़ते सामाजिक संवाद, संघर्ष और समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

हिन्दू समाज की तीन प्रमुख मांगें

1. दर्ज FIR वापसी

कुछ दिन पहले, पिछले शुक्रवार को, हिन्दू बहनों ने अवैध ढांचे पर नमाज़ पढ़ने से रोका था, या पहले भी इस मामले में जो एफआईआर हुई थीं, वे सभी वापस ली जाएंगी। सरकार ने इस FIR को पूरी तरह वापस लेने का निर्णय लिया है।

2. अवैध मस्जिद ढांचे की बिजली–पानी काटना

हिन्दू संघर्ष समिति की मांग थी कि अवैध मस्जिद ढांचे को किसी भी प्रकार की सरकारी सुविधा न दी जाए।
सरकार ने घोषणा की है कि वहां की बिजली और पानी की सप्लाई तुरंत बंद की जाएगी

3. अवैध ढांचे पर समिति का गठन

अवैध मस्जिद ढांचे की जांच और आगे की कार्यवाही के लिए एक संयुक्त समिति का गठन किया जाएगा।
इस समिति में हिन्दू संगठनों के प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी शामिल होंगे।
समिति की पहली बैठक 29 नवंबर को निर्धारित की गई है।

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